भारत का पुरूथान

वर्तमान समय कलयुग का चल रहा है इस समय अधर्म बढ़ चुका है आज के समय मे मनुष्य की भक्ति के प्रति आस्था कम हो गई है और कोई भक्ति करता ही नही है अगर भक्ति करते है तो शास्त्र विरुद्ध भक्ति करते है। वर्तमान में कलयुग इतना बढ़ गया है कि नकली साधु संत भी भक्ति के नाम पर लोगो को ठगने लग गए है।गीता जी के अध्याय 16 श्लोक 23-24 में इस मनमानी शास्त्र विरुद्ध भक्ति को वर्जित बताया है। वर्तमान में मनुष्य नास्तिक बन गए है इसका कारण भी मनमुखि साधना है क्योंकि मनुष्य शास्त्र विरुद्ध भक्ति करते है जिससे वे परमात्मा से प्राप्त होनर वाले लाभ से वांछित होते है उनको वे लाभ प्राप्त नही हो पाते इसलिए ज्यादातर मनुष्य नास्तिक हो जाते है। मनुष्य धनी बनने के लिए रिश्वत , चोरी , डाके डालते है जिससे ये परमात्मा के दोषी हो जाते है और प्राकृतिक कष्टो को झेलते है। मानव परमात्मा के विधान को भूलता जा रहा है कि किस्मत से अधिक प्राप्त नई हो सकता मनुष्य अवैध तरीके से धन प्राप्त करता है तो वो भी नई रहेगा।लेकिन कलयुग में भी सतयुग जैसा माहौल सिर्फ संत रामपाल जी महाराज ला सकते है। मानव सनातन काल से ही भक्ति करता आया है। सतयुग में सभी लोग सच्च बोलते थे।सतयुग उस युग को कहते है। जिस युग मे अधर्म नही होता था शांति होती थी , पिता से पहले पुत्र की मृत्यु नही होती थी।सारे व्यक्ति निरोगी होते थे सर्व मानव भक्ति करता था परमात्मा सर डरते थे। क्योंकि वे आध्यात्मिक ज्ञान से भली भांति परिचित थे। मावन अपने कर्म वचन से किसी को दुख नही पहुचाते थे और दुराचार नही करते थे। आज के समय मे संत रामपाल जी महाराज ही ही एकमात्र ऐसे संत है जो सतभक्ति बताते है। शास्त्रोनुकूल भक्ति बताते है। तथा पूर्ण परमात्मा के सतभक्ति का मार्ग बताते है।

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