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kabir bhagwan ki jivani

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कबीर साहेब (कबीरदास) का जीवन परिचयकबीर साहेब की जीवनी_ _ कबीर जी मिथक को दूर करने के लिए काशी से मगहर आए थे कि सच्चा उपासक मर सकता है कहीं भी वह भगवान को पा लेगा ।__ काशी के पंडितों ने एक मिथक फैला दिया था कि अगर मगहर में किसी व्यक्ति की मृत्यु हो जाती है, तो उसे गधे का अगला जन्म मिलेगा और अगर काशी में उसकी मृत्यु हो जाती है, तो वह स्वर्ग को प्राप्त करेगा। _ _ कबीर जी मिथक को दूर करने के लिए काशी से मगहर आए थे कि सच्चा उपासक मर सकता है कहीं भी वह भगवान को पा लेगा ।_कबीर जी ने उन्हें सख्ती से कहा कि वे उनके शरीर के लिए संघर्ष न करें, बल्कि शांति से रहें। कबीर साहब ने खुद को एक और चादर से ढँक लिया। कुछ समय बाद, कबीर जी ने आकाशवाणी की कि वह सतलोक जा रहे हैं जहाँ से वह आए हैं। कबीर जी के मृत शरीर को चादर के नीचे नहीं पाया गया था, इसके बजाय केवल सुगंधित फूल पाए गए थे। कबीर साहिब ने हिंदुओं और मुसलमानों को सद्भाव के साथ रहने का आदेश दिया। हिंदू और मुस्लिम दोनों ने आपस में फूल बांटे और स्मारक बनाया जो आज भी काशी में है । _ कबीर जी के सभी हिन्दू और मुस्लिम शिष्य एकत्रित हुए। मुस्लि...

way of living

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उपरोक्त कथाओं का सारांश:-1. ब्रह्म साधना अनुत्तम (घटिया) है।2. तीन ताप को श्री कृष्ण जी भी समाप्त नहीं कर सके। श्राप देना तीन ताप (दैविक ताप) में आता है। दुर्वासा के श्राप के शिकार स्वयं श्री कृष्ण सहित सर्व यादव भी हो गए।3. श्री कृष्ण जी ने श्रापमुक्त होने के लिए यमुना में स्नान करने के लिए कहा, यह समाधान बताया था। उससे श्राप नाश तो हुआ नहीं, यादवों का नाश अवश्य हो गया। विचार करें:- जो अन्य सन्त या ब्राह्मण जो ऐसे स्नान या तीर्थ करने से संकट मुक्त करने की राय देते हैं, वे कितनी कारगर हैं? अर्थात् व्यर्थ हैं क्योंकि जब भगवान त्रिलोकी नाथ द्वारा बताए समाधान यमुना स्नान से कुछ लाभ नहीं हुआ तो अन्य टट्पँुजियों, ब्राह्मणों व गुरूओं द्वारा बताए स्नान आदि समाधान से कुछ होने वाला नहीं है।4. पहले श्री कृष्ण जी ने दुर्वासा के श्राप से बचाव का तरीका बताया था। उस कढ़ाई को घिसाकर चूर्ण बनाकर प्रभास क्षेत्रा में यमुना नदी में डाल दो। न रहेगा बाँस, न बजेगी बाँसुरी, बाँस भी रह गया, 56 करोड़ यादवों की बाँसुरी भी बज गई।सज्जनो!वर्तमान में बुद्धिमान मानव है, शिक्षित है। मेरे द्वारा (सन्त रामपा...

The holy Bible

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God is in Form According to the Holy Bible -  See ProofGod is in human form, and Bible verses have proved it. What is God's name then? God is in form, and his name is Kabir.What does God look like? God Kabir looked like a human because he made all of us like himself in six days. When God appeared to Abraham and other great souls, he was in form. So, God Kabir is not formless, He is in form. God is in form according to the Bible. This article will clarify our doubts about - Is God formless or in form? Who is God, and where does he live?God is In form and Proofs in Bible. Is God Spirit?

पांच यज्ञ की जानकारी

🕛🕒🕕🕘🕛*पांच यज्ञ* ☺️👇🏻1) धर्म यज्ञ (२)ध्यान यज्ञ (३)प्रणाम यज्ञ (४) हवन यज्ञ (५) ज्ञान यज्ञ ------×××------×××---  *ध्यान यज्ञ* 👶🏼 के बारे में जानकारी !☺️👇🏻🙇‍♂️👇🏻☺️ध्यान के विषय में आम धारणा है कि एक स्थान पर बैठकर हठ पूर्वक मन को रोकने का प्रयत्न करने का नाम ध्यान है। पूर्व के ऋषियों ने लम्बे समय तक हठ योग के माध्यम से ध्यान यज्ञ किया। उन्होंने शरीर में परमात्मा को खोजने, परमात्मा के दर्शन के लिए ध्यान यज्ञ किया। शरीर में प्रकाश देखा जिसको ईश्वरीय प्रकाश कहते हैं।अन्त में ऋषियों ने अपना अनुभव बताया कि परमात्मा निराकार है। ध्यान अवस्था में परमात्मा का प्रकाश ही देखा जा सकता है। विचार करने की बात है कि कोई कहे कि सूर्य निराकार है। केवल सूर्य का प्रकाश देखा जा सकता है। यह बात कितनी सत्य है। इसी प्रकार आज तक सर्व ध्यानियों का अनुभव है। कुछ वर्षों तक ध्यान-समाधि करने के पश्चात् फिर सामान्य जीवन जीते थे तथा परमात्मा की अन्य साधना भी ऋषि लोग किया करते थे। यह ध्यान नहीं हठ योग के द्वारा कठिन तप होता है। जो श्रीमद्भगवत गीता अध्याय 17 श्लोक 5,6 में बताया है कि जो मनुष्य शास्त्र...

वेदों में पूर्ण परमात्मा की पहचान

वेदों में पूर्ण परमात्मा की पहचानपवित्र सामवेद संख्या 359 अध्याय 4 खंड 25 श्लोक 8 में प्रमाण है कि जो (कविर्देव) कबीर साहिब तत्वज्ञान लेकर संसार में आता है वह सर्वशक्तिमान सर्व सुखदाता और सर्व के पूजा करने योग्य है।ऋग्वेद मंडल 9 सुक्त 82 मंत्र 1 में लिखा है कि वह सर्वोत्पादक प्रभु , सृष्टि की रचना करने वाला, पाप कर्मो को हरण करने वाला राजा के समान दर्शनीय है इससे सिद्ध हुआ कि परमात्मा साकार है।ऋग्वेद मंडल 9 सुक्त 86 मंत्र 17 18 ,19 और 20 में प्रमाण है कि परमात्मा कबीर साहेब हैं और‌ वही असली राम हैं।अथर्वेद कांड नंबर 4 अनुवाद 1 मंत्र 7 में प्रमाण है कि पूर्ण परमात्मा कबीर साहेब हैं।यजुर्वेद अध्याय 5 मंत्र 1 ,6 और 8 में प्रमाण है कि परमात्मा साकार है।ऋग्वेद मंडल 9 सुक्त 82 मंत्र 1 में लिखा है कि वह परमात्मा पृथ्वी आदि लोकों के चारों तरफ शब्दायमान हो रहा है और वह अच्छी आत्मा को जो दृढ़ भक्त हैं उनको प्राप्त होता है।ऋग्वेद मंडल 9 सुक्त 94 श्लोक 4 में लिखा है कि वह परमात्मा अपने भक्तों को ज्ञान देने के लिए सशरीर आता है और सशरीर चला जाता है।पवित्र यजुर्वेद अध्याय 8 मंत्र 13 में प्रमाण है कि ...

कावड़ यात्रा

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कबीर, मानुष जन्म दुर्लभ है, मिले न बारम्बार।तरूवर से पत्ता टूट गिरे, बहुर न लगता डार।।हमारे शास्त्रों में मनुष्य जीवन को अति दुर्लभ बताया है। मनुष्य जीवन पाकर मानव भक्ति नहीं करता वह जीवन को बर्बाद करता है।वर्तमान में हिन्दू धर्म में जितनी भी भक्ति पूजा साधना चल रही है वास्तविकता में वह शास्त्र विपरीत भक्ति है जिससे लोगों को भक्ति करते हुए भी कोई आध्यात्मिक लाभ नहीं हो रहा।ऐसी ही एक साधना सावन के महीने में कांवड़ यात्रा होती है। कांवड़ यात्रा करने का किसी भी शास्त्र में प्रभु का निर्देश नहीं है। कांवड़ यात्री सैकड़ों हजारों किलोमीटर पैदल चलकर गंगा जल लाते हैं। उनके पैरों तले करोड़ों सूक्ष्म जीव मरते हैं। यह काल का एक सुनियोजित जाल है। बरसात के दिनों में अनेक सूक्ष्मजीव बिलों से बाहर निकल धरती पर आ जाते हैं ऐसे में कांवड़ यात्री पुण्य कमाने के उद्देश्य से पैदल चलता है तो उनके पैरों के नीचे करोड़ों सूक्ष्मजीव मर जाते हैं जिसका पाप उनके सिर पर रखा जाता है। कबीर साहिब ने कहा है:- करत है पुण्य, होत है पापम् ।वह पुण्य कमाने शिवजी को प्रसन्न करने चला था और कर...

गुरु गुरु में भेद

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                                         गुरु गुरु में भेद  विद्यालय में जो गुरू है वह आपको स्कूल के बाद क्या बनना है और पैसा कैसे कमाना है इसकी शिक्षा देगा।माता पिता भी गुरू की तरह ही होते हैं। जो समय समय पर मार्ग दर्शन करते हैं। परंतु प्रत्येक व्यक्ति को एक ऐसा गुरू चाहिए जो सबको एक जैसा ज्ञान दे,जो आत्मा की ज़रूरत को समझे, आखिर ऐसा गुरू कौन है? जो आर्ट ऑफ लिविंग,योगा, व्यवहारिक, सामाजिक ज्ञान से हटकर‌ पूर्ण परमात्मा का सच्चा ज्ञान‌ दे, जो वाकई में पूजनीय हो। सामाजिक गुरू सम्माननीय होते हैं परंतु पूजनीय तो केवल एक कबीर है।गुरु गोविंद करी जानिए, रहिए शब्द समाय ।मिलै तो दण्डवत बन्दगी , नहीं पलपल ध्यान लगाय ।। कबीर साहेब जी कहते हैं – हे मानव! गुरु और गोविंद को एक समान जानें । गुरु ने जो ज्ञान का उपदेश किया है उसका सिमरन/जाप करें । जब भी गुरु का दर्शन हो अथवा न हो तो सदैव उनका ध्यान करें जिसने तुम्हें गोविंद से मिलाप करने का सुगम मार्ग बताया है। गुरु को ईश...