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Showing posts from July, 2020

कावड़ यात्रा

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कबीर, मानुष जन्म दुर्लभ है, मिले न बारम्बार।तरूवर से पत्ता टूट गिरे, बहुर न लगता डार।।हमारे शास्त्रों में मनुष्य जीवन को अति दुर्लभ बताया है। मनुष्य जीवन पाकर मानव भक्ति नहीं करता वह जीवन को बर्बाद करता है।वर्तमान में हिन्दू धर्म में जितनी भी भक्ति पूजा साधना चल रही है वास्तविकता में वह शास्त्र विपरीत भक्ति है जिससे लोगों को भक्ति करते हुए भी कोई आध्यात्मिक लाभ नहीं हो रहा।ऐसी ही एक साधना सावन के महीने में कांवड़ यात्रा होती है। कांवड़ यात्रा करने का किसी भी शास्त्र में प्रभु का निर्देश नहीं है। कांवड़ यात्री सैकड़ों हजारों किलोमीटर पैदल चलकर गंगा जल लाते हैं। उनके पैरों तले करोड़ों सूक्ष्म जीव मरते हैं। यह काल का एक सुनियोजित जाल है। बरसात के दिनों में अनेक सूक्ष्मजीव बिलों से बाहर निकल धरती पर आ जाते हैं ऐसे में कांवड़ यात्री पुण्य कमाने के उद्देश्य से पैदल चलता है तो उनके पैरों के नीचे करोड़ों सूक्ष्मजीव मर जाते हैं जिसका पाप उनके सिर पर रखा जाता है। कबीर साहिब ने कहा है:- करत है पुण्य, होत है पापम् ।वह पुण्य कमाने शिवजी को प्रसन्न करने चला था और कर...

गुरु गुरु में भेद

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                                         गुरु गुरु में भेद  विद्यालय में जो गुरू है वह आपको स्कूल के बाद क्या बनना है और पैसा कैसे कमाना है इसकी शिक्षा देगा।माता पिता भी गुरू की तरह ही होते हैं। जो समय समय पर मार्ग दर्शन करते हैं। परंतु प्रत्येक व्यक्ति को एक ऐसा गुरू चाहिए जो सबको एक जैसा ज्ञान दे,जो आत्मा की ज़रूरत को समझे, आखिर ऐसा गुरू कौन है? जो आर्ट ऑफ लिविंग,योगा, व्यवहारिक, सामाजिक ज्ञान से हटकर‌ पूर्ण परमात्मा का सच्चा ज्ञान‌ दे, जो वाकई में पूजनीय हो। सामाजिक गुरू सम्माननीय होते हैं परंतु पूजनीय तो केवल एक कबीर है।गुरु गोविंद करी जानिए, रहिए शब्द समाय ।मिलै तो दण्डवत बन्दगी , नहीं पलपल ध्यान लगाय ।। कबीर साहेब जी कहते हैं – हे मानव! गुरु और गोविंद को एक समान जानें । गुरु ने जो ज्ञान का उपदेश किया है उसका सिमरन/जाप करें । जब भी गुरु का दर्शन हो अथवा न हो तो सदैव उनका ध्यान करें जिसने तुम्हें गोविंद से मिलाप करने का सुगम मार्ग बताया है। गुरु को ईश...

परमात्मा ही गुरु की भूमिका स्वयं निभाते है

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परमात्मा ही गुरु की भूमिका स्वयं निभाते हैंगुरु बनाने से पहले यह जानना भी ज़रूरी है कि गुरू का गुरू कौन है जैसे डाक्टर से इलाज करवाने से पहले उसकी डिग्री देखते हैं, अध्यापक को नौकरी पर रखने से पहले उसका शिक्षा संबंधी बैकग्राउंड चैक करते हैं उसी प्रकार गुरू बनाने से पहले यह जांचना ज़रूरी है कि गुरू , गुरू कहलाने लायक भी है या नहीं।कबीर साहेब जी 600 वर्ष पूर्व काशी में आए थे जब उन्होंने पांच वर्ष की आयु में 104 वर्षीय रामानंद जी को अपना गुरू बनाया। अति आधीन रहकर गुरू शिष्य परंपरा का निर्वाह किया व समाज को यह उदाहरण करके दिखाया कि जब सृष्टि का पालनहार गुरू बनाकर नियम में रहकर भक्ति कर रहा है तो आप किस खेत की मूली हैं।जब तक गुरू मिले न सांचातब तक गुरू करो दस पांचा।।सच्चा सतगुरु वही है जो हमारे सभी धर्मों के शास्त्रों से सिद्ध ज्ञान और सद्बुद्धि देकर मोक्ष देता है। आज वर्तमान पूरे विश्व में जगतगुरु संत रामपाल जी महाराज ही सच्चे व पूर्ण गुरु है, इसलिए संत रामपाल जी से नाम दीक्षा लें और अपना कल्याण करवाए

अच्छे समाज का निर्माण

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अच्छे समाज का निर्माण कैसे होगा ?अच्छे समाज का निर्माण एक संत जी जो कबीर भगवान के अवतार के रूप में आये वो ही कर सकते है जिनका नाम तत्वदर्शी संत रामपाल जी महाराज है जो समाज मे सभी बुराइयां को छुड़वाते है। संत रामपाल जी महाराज जो समाज में बुराइयां छोड़ने के लिए अनेक अभियान चलाए :-1) संत रामपाल जी महाराज ने सबसे पहले समाज मे सुधार करने के लिए सभी व्यक्ति को नशा नहीं करने की शिक्षा दी और जो भी व्यक्ति संत रामपाल जी महाराज के अनुयायी है वो कोई भी नशा नही करता है और नही नशे की वस्तु लाके देते है।2) संत रामपाल जी महाराज ने देहज मुक्त अभियान चलाया ओर सीधे-सरल तरीके से शादी करने के लिए प्रेरित किया। संत रामपाल जी महाराज के अनुयायी सभी देहज मुक्त शादी करते है और किसी प्रकार का लड़के-लड़की में भेदभाव नही करते है।3) संत रामपाल जी महाराज छुआछूत जैसी बुराई को हटाते है संत रामपाल जी महाराज कहते है-*जीव हमारी जाती है,मानव धर्म हमारा।हिन्दू,मुस्लिम,सिख,ईसाई, धर्म नही कोई न्यारा।।*संत रामपाल जी महाराज के अनुयायी किसी प्रकार की छुआछूत नही करते है सभी के साथ एक परिवार के समान रहते है।...