राजनीति और हमारा समाज
राजनीति और हमारा समाज
बात करते है राजनीति और समाज के बारे में ।हमारे देश मे चुनाव किसी त्योहार से कम नही है , गरीबो को रोटी मिले या न मिले लेकिन झूठे वादों से उनका पेट भर दिया जाता है, नेताओ द्वारा वो तमाम वादे किए जाते है जो कभी पूरे नही हो सकते।
राजनीति आज एक सफल व्यवसाय में परिवर्तित हो चुकी है।
ये बात तो आज आप सब जानते ही है क्योंकि भारत की अधिकांश जनसख्या यतो मजदूर है या किसान ।
मजदूर के शरीर मे उनके मालिक इतना खून भी नही छोड़ते की वो देश दुनिया के बारे में सोचे वो अपने परिवार के बारे में भी सोच ले तो बड़ी बात है। रही बात किसान की तो किसान क्या कर रहा है? किसान आत्महत्या कर रहे हैं।क्योंकि किसान के लिए नेताओ के पास सिर्फ वादे है लेकिन वादों से न धान, न गेहू ओर न ही गन्ना कोई भी फसल तैयार नही होती।
राजनीति में जातिवाद अपने शुरूआती दोर से ही है।जिसका एक मूल उद्देश्य है ही देश की एकता और अखंडता को तोड़ना है। जनता के मुद्दों को वोट वनक में बदलन एक परिपाटी बन गई है जिसे कोई भी पार्टी पीछे नही रहना चाहती।
भड़काऊ भाषण अपनी चरम सीमा पर है इस सवैधानिक पद पर बेठे इन जिमेदार लोगो द्वारा गेर जिमेदारिया बरती जा रही है।
आज राजनेता किसी लोमड़ी से कम नही है उनका दिमाग इटनक शातिर है कि वो जनता की नव्ज पकड़ने में अधिक समय व्यर्थ नही करते। ओर इसका समाज पर बहुत गहरा प्रभाव पड़ता है।
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